Sahil writer

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मुझे तेरी याद आज भी है



तेरे साथ बीती मेरी हर सुबहो शाम 

तेरे साथ गुजर हुए पल मुझे याद आज भी है

मेरे सामने आते ही तेरी बातो का सैलाब आ जाता था
वो कभी न खत्म होने वाली बाते याद मुझे आज भी है

मेरे रूठने पर मेरा मानना याद मुझे आज भी है
मेरा हर नखरे उठाना याद मुझे आज भी है

अपने कंधे पर सर को रखकर मेरे बालो को सहलाना मुझे याद आज भी है

भूल गया तू मुझे ये तेरी कोई मजबूरी थी
पर ये याद रखना मुझे तेरा इंतज़ार आज भी है



Sahil writer


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